सोमवार, 31 दिसंबर 2018

यूनिवर्सल बेसिक इंकम सिस्टम: महत्व और आवश्यक शर्तें

'यूनिवर्सल बेसिक इनकम सिस्टम' इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि "स्वस्थ शरीर व मस्तिष्क वाले लोग यदि आजीविका-निर्वाह हेतु आवश्यक तय धनराशि 'कर्ज चुकाने के भय से मुक्त होकर' पाने लगेंगे तो वे निश्चित तौर पर अपनी उन्नति की दिशा में अग्रसर होंगे और उनकी उन्नति के साथ-साथ देश की उन्नति भी होगी।" लेकिन  इसके लिए 'कुछ महत्वपूर्ण शर्तें' भी जरूरी हैं-
(1) 'मद्यपान अर्थात शराब का सेवन', 'किसी मादक या नशीले पदार्थ का सेवन'(ऐसे ड्रग्स या दवाओं को छोड़कर जिसे किसी मानसिक रोगी का उपचार कर रहा मनोचिकित्सक उसके उपचार के लिए आवश्यक मानता हो) और 'जुआ' को 'दंडनीय अपराध' बनाया जाए। क्योंकि इन दुर्व्यसनों से युक्त व्यक्ति 'यूनिवर्सल बेसिक इनकम' का 'दुरुपयोग' ही करेगा। बाकी मानसिक व शारीरिक दिव्यांगों और अशक्तों के लिए अलग से पेंशन की व्यवस्था तो अब भी है और आगे भी रहेगी। यह पेंशन 'बेसिक इनकम से अलग' होगी।
(2) बेसिक इनकम के दोगुनी से अधिक आमदनी पर एक या दो प्रतिशत टैक्स लगे( उदाहरणस्वरूप यदि बेसिक इनकम की धनराशि तीन हजार रुपये मासिक हो तो 'छह हजार रुपये' से ऊपर और बीस हजार रुपये तक की मासिक आमदनी पर 'एक प्रतिशत' और बीस हजार रुपये से पचास हजार रुपये की मासिक आमदनी पर 'दो प्रतिशत') जबकि '50 हजार से एक लाख रूपये की मासिक आमदनी' पर 'न्यूनतम तीन से अधिकतम पाँच प्रतिशत', 'एक लाख से पाँच लाख रुपये की मासिक आमदनी' पर 'न्यूनतम छह प्रतिशत से लेकर अधिकतम दस प्रतिशत', 'पाँच लाख से दस लाख रूपये की मासिक आमदनी' पर 'न्यूनतम दस प्रतिशत से अधिकतम 15 प्रतिशत तक', तथा 'दस लाख से बीस लाख रुपये की मासिक आमदनी' पर '15 से 20 प्रतिशत', 'बीस से तीस लाख रुपये की मासिक आमदनी' पर '20 से 25 प्रतिशत तक', 'तीस से पचास लाख रुपये की मासिक आमदनी' पर '25 से 30 प्रतिशत' तथा '50 लाख रुपये से ऊपर' की मासिक आमदनी पर 'अधिकतम 35 प्रतिशत तक' का टैक्स लगे।
(3) इसके दायरे में 'बीस वर्ष की आयु से लेकर पचास वर्ष तक की आयु' वाले "वे लोग ही आने चाहिए जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम है अथवा जो उच्च शिक्षा हासिल करके बेरोजगार हैं अथवा जिनके पास 'खुद के नाम से छह या छह बीघे से कम' खेती-योग्य ही जमीन हो ।" जबकि पचास वर्ष से ऊपर की आयु वालों के लिए 'वृद्ध पेंशन' की व्यवस्था होनी चाहिए।