गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

आतंकवाद के अन्त के लिए एकजुट हो सभी शक्तिशाली राष्ट्र

पुलवामा हमले की जिम्मेदारी लेने वाला आतंकी संगठन 'जैश-ए-मुहम्मद' किसी दूसरे ग्रह पर तो है नहीं! सब लोग भलीभाँति जानते हैं कि 'लश्कर-ए-तैयबा' और 'जैश-ए-मुहम्मद' किस धरती पर पल रहे हैं ? लेकिन चूँकि वर्तमान में भारत ही इसका प्रमुख 'भुक्तभोगी' है इसलिए 'विश्व के अन्य बड़े देशों' में इसके प्रति कोई चिन्ता एवं गम्भीरता दिखाई नहीं दे रही है। 9/11 के आतंकी आक्रमण की चोट खा चुका अमेरिका भी अब 'आतंकवादियों के प्रति उदार' बन रहा है जबकि उसे यह बात अच्छी तरह पता होनी चाहिए कि 'आतंकवाद की चोट' समय और परिस्थिति के अनुसार कभी भी किसी को भी घायल कर सकती है।
  पुलवामा पर हमले की नई शैली से इस बात का पूरा संकेत मिल चुका है कि 'पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद' अब 'आईएसआईएस' और 'तालिबान' से तनिक भी भिन्न नहीं है। आतंकवाद के ये तीनों स्वरूप 'सम्पूर्ण विश्व' के लिए 'समान रूप से खतरनाक' हैं। इसलिए भारत सहित 'विश्व के समस्त बड़े राष्ट्रों' को 'आतंकवाद के इन तीनों पाकिस्तानी, तालिबानी और सीरियाई स्वरूपों के विरूद्ध एकजुट होकर युद्ध करना होगा।
  आतंकवाद के इन तीनों स्वरूपों को समाप्त करने के लिए विश्व के सभी शक्तिशाली राष्ट्रों द्वारा भारत के साथ मिलकर गम्भीरतापूर्वक 'कठोर कार्रवाई' करनी ही होगी, अन्यथा "आतंकवाद के माध्यम से एक सम्प्रदाय-विशेष की ओर से लड़ी जा रही 'सभ्यता-एकाधिकारवाद' की लड़ाई 'पूरे विश्व के लिए महासंकट' बन जाएगी।" तब पछताने के अतिरिक्त अन्य कोई उपाय शेष नहीं रहेगा !!
     -- शशांक कुमार राय, राजनीतिक विश्लेषक

रविवार, 10 फ़रवरी 2019

रामायण और रामचरितमानस की महिमा

"महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरित मानस श्रेष्ठ आचरण आधारित मनुष्य के स्वधर्मपालन से जुड़े पवित्र ग्रंथ हैं। इनमें वर्णित भगवान श्रीराम, माता सीता, भगवान हनुमान, परमपूज्य भरत, श्रद्धेय लक्ष्मण, निषादराज गुह, माता शबरी, माता कौशल्या-कैकेयी-सुमित्रा, माता ऊर्मिला, श्रद्धेय शत्रुघ्न, राजा दशरथ, वानरराज सुग्रीव, कपिश्रेष्ठ अंगद, नल व नील, विभीषण, रावण, मन्दोदरी, मेघनाथ समेत समस्त पात्र "मानवता की आचरण शैली के श्रेष्ठ प्रतिनिधि हैं।"
इसके अलावा "भगवान श्रीराम, माता सीता, महावीर कपिमुनि भगवान हनुमान, श्रद्धेय भरत व लक्ष्मण" ये सभी लोग "श्रेष्ठ मानवीय आचरणों की प्रतिमूर्ति हैं तथा समस्त मानवता के लिए प्रेरणाप्रद हैं।"
"राम एक संस्कृति हैं और श्रेष्ठ मानवता के सर्वोच्च आदर्श हैं।" 'राम' जाति, वर्ग, पंथ, देश, इत्यादि से परे "समस्त मानवता के आचरण-ईष्ट, महापुरुष और एक 'सर्वश्रेष्ठ वैश्विक महामानव" हैं। 'माता सीता' समस्त नारी जगत के लिए 'अनमोल आदर्श' हैं। वहीं कपिमुनि भगवान हनुमान संयम, त्याग, कर्तव्यपालन, स्वानुशासन, बुद्धिमत्ता, वीरता तथा अन्य सभी श्रेष्ठ गुणों से युक्त परम वन्दनीय ईष्ट-देव हैं। "वहीं दूसरी ओर 'त्याग, समर्पण और प्रेम' की प्रतिमूर्ति 'पूज्यनीय भरत जी' वर्तमान मानव समाज के 'प्रेरणा-पुरुष' हैं।"
"चूँकि दोनों पावन ग्रंथ 'रामायण' और 'रामचरितमानस' मानव धर्म, पुरुष व स्त्री धर्म, भ्रातृ धर्म, सेवा-धर्म, मित्र-धर्म, कर्तव्य-धर्म, राजधर्म इत्यादि के साथ-साथ प्रेम, त्याग, तपस्या, समर्पण, साधना, अनुशासन, सदाचार, नैतिकता, वैराग्य, मानवता, सज्जनता, सच्चरित्रता, निष्काम कर्मयोग एवं सच्ची लगन व सच्ची भक्ति सहित अनेक सद्गुणों के साक्षात प्रतिबिम्ब अथवा सच्चे प्रतीक हैं" इसलिए मैं महर्षि वाल्मीकि और उनकी कृति रामायण तथा गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस सहित इन ग्रंथों का सम्मान, अध्ययन व श्रवण करने वाले समस्त श्रेष्ठ जनों को मैं सादर वन्दन करता हूँ। अन्त में 'रामचरितमानस' के उत्तम विश्लेषक 'परम पूज्य  आचार्य मुरारी बापू' को बारम्बार प्रणाम करता हूँ।"
                                            --शशांक कुमार राय