देश की नौकरशाही में कितनी भी कमियां हो,लेकिन फिर भी यह देश की राजनीतिक व्यवस्था का इंजन है। लेकिन ऐसा माना जाने लगा है कि भारत का लक्ष्य तो विकास का है,किन्तु यहां कि नौकरशाही एक रुठे हुए मेजबान के रुप में देश के विकास रुपी मेहमान की उचित देखभाल करने में अक्षम साबित हुई है।इसके अनेक कारणों में से एक कारण यह भी है कि भारत में अब तक निष्पक्ष नौकरशाही का विकास अब तक नहीं हो पाया है। लेकिन इन सबसे अलगनौकरशाही का राजनीतिकरण भी नौकरशाही के लिए एक बड़ी समस्या है। हालांकि इसके लिए राजनेता और प्रशासक दोनों ही जिम्मेदार हैं। केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा अपनी-अपनी प्रशासनिक मशीनरियों का अपने स्वार्थ के लिए किया जा रहा उपयोग भी एक बड़ी समस्या है।अभी हाल ही में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी का आयकर अधिकारियों को धमकाना भी न केवल राजनीतिक दृष्टि से अनैतिक है बल्कि नौकरशाही के राजनीतिकरण की धारणा को भविष्य में और हवा देने का प्रयास है। इससे अच्छे नौकरशाहों का मनोबल गिरेगा और साथ में निष्पक्ष नौकरशाही के विकास की प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है। नौकरशाही के साथ राजनीतिक खिलवाड़ देश की राजनीतिक व्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है।
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