'लोकतांत्रिक जनकल्याणकारी राजनीति' वह प्रक्रिया है जिसके तहत 'सार्वजनिक कल्याण' के लिए औचित्यपूर्ण तरीके से 'न्यासिता रूपी सत्ता' प्राप्त करके 'विधिसम्मत तरीके से समाज में मूल्यों का प्राधिकारिक आवंटन' किया जाता है और 'जनसामान्य द्वारा प्राप्त प्रतिपुष्टि (फीडबैक) के माध्यम से राजनीतिक व्यवस्था में निरन्तर सुधार' किया जाता है। परन्तु वर्तमान समय में 'भारत की लोकतांत्रिक जनकल्याणकारी राजनीति' संकट में है क्योंकि वर्तमान समय में यहाँ न तो जनकल्याण की दिशा में सत्ता का सही तरीके से सदुपयोग हो पा रहा है और न ही औचित्यपूर्ण तरीके से मूल्यों का आवंटन ही हो पा रहा है। इसके अलावा भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में सुधार हेतु जनसामान्य का उचित फीडबैक प्राप्त न होना भी एक समस्या है। मेरे विचार से अब यह समय आ गया है कि 'लोग' अथवा 'जनसामान्य' (पब्लिक) 'कोउ नृप होउ हमें का हानि' और अपने 'अलग-अलग संकुचित स्वार्थों' से परे होकर भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में सुधार की दिशा में अपनी एक 'अभूतपूर्व' प्रतिपुष्टि (रिवोल्यूशनरी फीडबैक) दें। भारतीय जनता निजी स्वार्थों और संकीर्णताओं से परे होकर एकजुटता से एक मजबूत परिवर्तनकारी प्रतिपुष्टि देगी तभी भारतीय राजनीतिक प्रणाली में सुधार होगा।
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