शनिवार, 27 अप्रैल 2019

ज़िन्दगी (कविता)

--:ज़िन्दगी:--

"न जाने कितने रंग दिखाती है जिन्दगी,
हर मोड़ पर सबक सीखाती है जिन्दगी।
मुश्किलों की राहों से क्यों होते हो परेशान,
ठोकरों से भी सँभलना सीखाती है जिन्दगी।
दर्द का मुस्कुराकर सामना करो,
काँटों के साथ फूल भी खिलाती है जिन्दगी।
माना कि अपने सितारे अभी है छिपे हुए,
पर अँधेरे के बाद रोशनी लाती है जिन्दगी।
ख्वाबों को अभी है हकीकत की जूस्तजू,
इन्तजार करने का मजा दिलाती है जिन्दगी।
दिल में दर्द का सैलाब, चेहरे पे शिकन तक न हो,
जिन्दगी को भी जीना सीखाती है जिन्दगी।
कब तक छिपी रहेंगी अपनी कमजोरियाँ,
खुद को भी आइना दिखाती है जिन्दगी।"
                          -शशांक कुमार राय

बुधवार, 24 अप्रैल 2019


        --:"स्नातक-शिक्षा की गुणवत्ता हेतु 'नेट(एनईटी)' उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता हो जरूरी !":--
                                       --शशांक कुमार राय

     विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में कहीं भी स्नातक-स्तर पर 'असिस्टेंट प्रोफेसर' के पद पर नियुक्ति के लिए 'नेट की अनिवार्यता' बनाये रखना ही 'स्नातक शिक्षा की गुणवत्ता' के लिए उचित है! इसमें बदलाव किसी भी हाल में और किसी के भी द्वारा नहीं होना चाहिए, क्योंकि यहीं उचित भी है और तर्कसंगत भी!
   नेट (NET) परीक्षा में 'विषय का गहराई से परीक्षण' होता है। साथ ही तार्किक क्षमता, शोध क्षमता, शिक्षण कौशल, सूचना तकनीक, संचार कौशल, पठन क्षमता, गणना क्षमता, उच्च शिक्षा, पर्यावरण ज्ञान और भारतीय संविधान व राज्यव्यवस्था सम्बन्धी जानकारियों का पारदर्शी व उचित तरीके से परीक्षण होता है। एक स्नातक स्तरीय शिक्षक के लिए यह परीक्षण आवश्यक है ताकि 'स्नातक-शिक्षा की गुणवत्ता' बनी रहे। इसी को ध्यान में रखते हुए पिछले 'पचीस-तीस वर्षों' से 'नेट' परीक्षा कराई जा रही है तथा अब तक 'नेट' को 'पीएचडी में प्रवेश' और 'स्नातक-स्तर पर सहायक प्राध्यापक या व्याख्याता पद' पर नियुक्ति के लिए अनिवार्य माना जाता रहा है। यह तर्कसंगत भी है और 'स्नातक स्तरीय शिक्षा की गुणवत्ता के लिए आवश्यक' भी। इसलिए इस व्यवस्था में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए!
   "एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति सहित 'परास्नातक व एम.फिल. स्तर पर शिक्षण' के लिए 'नेट के साथ पीएचडी' को अनिवार्य किया जा सकता है।" स्नातक-स्तर पर शिक्षण-कार्य हेतु 'शोध' की अपेक्षा 'विषय-ज्ञान' अधिक महत्वपूर्ण होता है। शोध कार्य तो परास्नातक व एम.फिल. में 'लघुशोध-प्रबन्ध(Dissertation)' तैयार करने तथा पी-एच.डी. में 'शोध-प्रबन्ध(Thesis)' तैयार करने में होता है।
   "2009 और 2016 के रेगुलेशन से पीएचडी करने वालों को 'स्नातक-कक्षाओं' में पढ़ाने के लिए योग्य मानते हुए उन्हें 'नेट(NET) से छूट' प्रदान करना, 'नेट-उत्तीर्ण प्रतिभाशाली, परिश्रमी और पूरे विषय का ज्ञान रखने वाले लोगों' के लिए 'छलावा' होने के साथ-साथ  'स्नातक-स्तर की शिक्षा की गुणवत्ता' के साथ 'खिलवाड़' है।" ' स्नातक-शिक्षा' में 'किसी एक टॉपिक पर शोध व एक-दो टॉपिक पर रिसर्च पेपर-पब्लिकेशन' की बजाय 'सम्पूर्ण विषय के ज्ञान' का महत्व अधिक होता है, क्योंकि 'स्नातक-स्तर' पर 'पूरा विषय' पढाया जाता है। इसलिए "स्नातक-स्तर के शिक्षकों को किसी भी दशा में 'नेट से छूट' प्रदान करना एकदम अनुचित और 'स्नातक-शिक्षा' की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ है।
"मेरा मत तो यह है कि परास्नातक+एम.फिल+नेट के प्राप्तांकों को जोड़कर 'मेधा-सूची'(Merit List)' तैयार की जानी चाहिए और उसी आधार रिक्तियों के अनुसार 'मेरिट-लिस्ट' में जगह बनाने वाले परास्नातक+एम.फिल.+नेट उपाधिधारकों को 'स्नातक-शिक्षक(सहायक प्राध्यापक या प्रवक्ता) के रूप में नियुक्ति कर दी जानी चाहिए" जबकि "'परास्नातक और एम.फिल.' कक्षाओं में पढ़ाने के लिए 'नेट(N.E.T.) और पी-एच.डी.' को 'अनिवार्य' बनाया जाना चाहिए।"               
  लेखक परिचय --शशांक कुमार राय, S/O-श्री सहजानन्द राय, ग्राम व पोस्ट-रेवतीपुर, मुहल्ला-भीष्मदेव राय, थाना व ब्लाक-रेवतीपुर, जिला-गाजीपुर, उत्तर प्रदेश, पिन कोड-232328, मोबाइल नम्बर - 9559451961
 शैक्षिक परिचय :-- (1) एम.ए., राजनीति विज्ञान(75.50%)-2007, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय(बीएचयू), वाराणसी
(2) स्नातकोत्तर डिप्लोमा, हिन्दी पत्रकारिता (64.50%)-2010, भारतीय जनसंचार संस्थान(आईआईएमसी), नई दिल्ली,
(3) बी.एड.(70.70%) -2012, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर, उत्तर प्रदेश
(4) सामाजिक विज्ञान विषय, हिन्दी,अंग्रेजी,शिक्षा मनोविज्ञान विषयों के साथ उच्च प्राथमिक स्तरीय केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा(Upper Primary Level C.T.E.T. Qualified With Social Sience, Hindi, English, Education Psychology)-2016, 62% अंक के साथ उत्तीर्ण(Qualified with 62% Marks), obtained 93 in 150 (150 में 93 अंक प्राप्त)
(5) एम.फिल. राजनीति विज्ञान(62.83%)-2016, महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
(6) "सहायक प्राध्यापक हेतु राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा(National Eligibility Test for Assistant Professor)- जुलाई, 2018 में उत्तीर्ण
कार्य परिचय - "बेरोजगार"