शनिवार, 27 अप्रैल 2019

ज़िन्दगी (कविता)

--:ज़िन्दगी:--

"न जाने कितने रंग दिखाती है जिन्दगी,
हर मोड़ पर सबक सीखाती है जिन्दगी।
मुश्किलों की राहों से क्यों होते हो परेशान,
ठोकरों से भी सँभलना सीखाती है जिन्दगी।
दर्द का मुस्कुराकर सामना करो,
काँटों के साथ फूल भी खिलाती है जिन्दगी।
माना कि अपने सितारे अभी है छिपे हुए,
पर अँधेरे के बाद रोशनी लाती है जिन्दगी।
ख्वाबों को अभी है हकीकत की जूस्तजू,
इन्तजार करने का मजा दिलाती है जिन्दगी।
दिल में दर्द का सैलाब, चेहरे पे शिकन तक न हो,
जिन्दगी को भी जीना सीखाती है जिन्दगी।
कब तक छिपी रहेंगी अपनी कमजोरियाँ,
खुद को भी आइना दिखाती है जिन्दगी।"
                          -शशांक कुमार राय

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