--:छद्म राष्ट्रवाद और राष्ट्रवाद:--
छद्म राष्ट्रवाद एक प्रकार की नकारात्मकता से युक्त विचारधारा है जिसका इस्तेमाल तमाम दक्षिणपंथी पार्टियां और कट्टरपंथी व उग्रवादी या आतंकवादी संगठन दुनियाभर में करते आये हैं।
छद्म राष्ट्रवाद इतिहास के एक ख़ास समय के एक ख़ास पंथ या संस्कृति को महत्व देने की बात करता है। "यह उस राष्ट्रवाद के बिलकुल उलट है जो अपने देश में 'समाहित मिश्रित संस्कृति' में अपना गौरव देखता है तथा जो अपने देश, अपनी सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना को प्रगतिशीलता के मार्ग पर आगे बढ़ने की जरूरत मानता है।"
छद्म राष्ट्रवाद हमें देश के लिए जान देने से ज्यादा जान लेना सिखाता है। यह वह राष्ट्रवाद है जो खुद की आलोचना को हमेशा देशद्रोह से जोड़कर देखता है। इस छद्म राष्ट्रवाद ने अपने नायकों को कभी भी उस काल में नहीं ढूंढा जिसमें भारत की स्वतंत्रता और उसके निर्माण में लगे लोग कुर्बानियां दे रहे थे।" इसने उन्हें बहुत पीछे जाकर ढूंढा ताकि उन्हें अपने हिसाब से इस्तेमाल किया जा सके और जहां एक वीर नायक के हर पराक्रम को दूसरे धर्म के विरुद्ध लड़ा गया धर्म युद्ध बताया जा सके।"
"उक्त छद्म राष्ट्रवाद के विपरीत भारत के वास्तविक राष्ट्रवाद का निर्माण 'संवैधानिक देशभक्ति' से हुआ है, जिसमें हमारी साझी विरासत और विविधता के प्रति प्रशंसा का भाव शामिल है और जो भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन से उपजे विविध पंथों, संस्कृतियों, वर्गों और आस्थाओं के समान सहअस्तित्व पर बल देता है।"
"भारतीय राष्ट्रवाद किसी एक धर्म, एक संस्कृति और किसी एक भाषा का प्रतिनिधित्व नहीं करता बल्कि यह समस्त भारतीयों की सामूहिक एकता, बहुलवादिता, बहुसांस्कृतिकता और सर्वपंथ समभाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो 'विविधता में एकता' की संकल्पना पर आधारित है।"
छद्म राष्ट्रवाद एक प्रकार की नकारात्मकता से युक्त विचारधारा है जिसका इस्तेमाल तमाम दक्षिणपंथी पार्टियां और कट्टरपंथी व उग्रवादी या आतंकवादी संगठन दुनियाभर में करते आये हैं।
छद्म राष्ट्रवाद इतिहास के एक ख़ास समय के एक ख़ास पंथ या संस्कृति को महत्व देने की बात करता है। "यह उस राष्ट्रवाद के बिलकुल उलट है जो अपने देश में 'समाहित मिश्रित संस्कृति' में अपना गौरव देखता है तथा जो अपने देश, अपनी सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना को प्रगतिशीलता के मार्ग पर आगे बढ़ने की जरूरत मानता है।"
छद्म राष्ट्रवाद हमें देश के लिए जान देने से ज्यादा जान लेना सिखाता है। यह वह राष्ट्रवाद है जो खुद की आलोचना को हमेशा देशद्रोह से जोड़कर देखता है। इस छद्म राष्ट्रवाद ने अपने नायकों को कभी भी उस काल में नहीं ढूंढा जिसमें भारत की स्वतंत्रता और उसके निर्माण में लगे लोग कुर्बानियां दे रहे थे।" इसने उन्हें बहुत पीछे जाकर ढूंढा ताकि उन्हें अपने हिसाब से इस्तेमाल किया जा सके और जहां एक वीर नायक के हर पराक्रम को दूसरे धर्म के विरुद्ध लड़ा गया धर्म युद्ध बताया जा सके।"
"उक्त छद्म राष्ट्रवाद के विपरीत भारत के वास्तविक राष्ट्रवाद का निर्माण 'संवैधानिक देशभक्ति' से हुआ है, जिसमें हमारी साझी विरासत और विविधता के प्रति प्रशंसा का भाव शामिल है और जो भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन से उपजे विविध पंथों, संस्कृतियों, वर्गों और आस्थाओं के समान सहअस्तित्व पर बल देता है।"
"भारतीय राष्ट्रवाद किसी एक धर्म, एक संस्कृति और किसी एक भाषा का प्रतिनिधित्व नहीं करता बल्कि यह समस्त भारतीयों की सामूहिक एकता, बहुलवादिता, बहुसांस्कृतिकता और सर्वपंथ समभाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो 'विविधता में एकता' की संकल्पना पर आधारित है।"